लक्ष्मणगढ़। कस्बे के निकटवर्ती गांव ढोलास की कामधेनु गौशाला में चल रही कथा के चौथे दिन व्यासपीठ ने भगवान विष्णु के वामन, राम और कृष्ण अवतार की कथा सुनाई। धर्म की पुनर्स्थापना और दुष्टों के विनाश के लिए अवतरित हुए। वामन भगवान ने राजा बलि का घमंड तोड़ने के लिए बौना रूप धारण कर तीन पग में तीनों लोक नाप लिए। राम अवतार में रावण वध और कृष्ण अवतार में कंश व महाभारत में दुष्टों के नाश हेतु अवतरण हुआ। असुर राज बलि ने देवताओं से स्वर्ग छीन लिया था, उन्हें परास्त करने के लिए भगवान ने वामन रूप लिया। भगवान विष्णु ने कश्यप और अदिति के पुत्र के रूप में ब्राह्मण बालक (बौने) का अवतार लिया। वे बलि के यज्ञ में गए और दान में तीन पग भूमि माँगी। पहले पग में पृथ्वी, दूसरे में स्वर्ग नाप लिया और तीसरे पग में बलि ने खुद को समर्पित कर दिया, तो वामन ने उसे पाताल लोक का राजा बना दिया और इंद्र को पुनः स्वर्ग मिल गया। राम अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र के रूप में जन्मे। विश्वामित्र के साथ जाकर राक्षसों का संहार किया और सीता से विवाह किया। कैकेयी के वचनों के कारण 14 वर्ष का वनवास लिया। रावण द्वारा सीता हरण के बाद, हनुमान जी की सहायता से लंका पर विजय प्राप्त की और धर्म की पुनर्स्थापना की। कंस, महाभारत में दुष्टों का विनाश और गीता का ज्ञान देना। मथुरा में वासुदेव-देवकी के पुत्र के रूप में जन्म, लेकिन पालन-पोषण गोकुल में यशोदा-नंद ने किया। बचपन में कंस के राक्षसों को मारा। बाद में पांडवों का साथ देकर धर्मयुद्ध (महाभारत) में दुष्टों का नाश किया ये सब चीजें विस्तार से बताई। इस अवसर पर बाला के बास आश्रम के सुन्दरनाथ महाराज, लक्ष्मणगढ़ नागरिक परिषद के संरक्षक राजकुमार पारीक, सचिव निशांत गोयनका, शिक्षाविद् गिरधारीलाल शर्मा, डॉ रेखा शर्मा, राधेश्याम लाटा, गौसेवक संजय जोशी, इन्दरसिंह शेखावत, माधव दाधीच, मांगीलाल जांगिड़, पुरुषोत्तम मिश्रा, विट्ठल मिश्रा, मनोहर सिंह, नितेश गौतम, लक्ष्मी गौतम आदि का सम्मान किया गया।
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