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आगरा: राजपुर चुंगी बगिया - ताल सेमरी मार्ग की बदहाल स्थिति से बढ़ा हादसों का खतरा, नाले में कार पलटने से बाल-बाल बची मासूम

आगरा। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार एक तरफ प्रदेश को 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' बनाने और शहरों के सौंदर्यीकरण पर हजारों करोड़ खर्च कर रही है, वहीं ताजनगरी आगरा का दक्षिण क्षेत्र आज अपनी बदहाली पर खून के आँसू रो रहा है। राजपुर चुंगी बगिया से ताल सेमरी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग अब सड़क नहीं, बल्कि गंदगी, कीचड़ और हादसों का एक डरावना जाल बन चुका है।

हादसे को दावत: नाले में पलटी कार, बाल-बाल बचे मासूम


आगरा के इस मार्ग की बदहाली का सबसे खतरनाक मंजर कल उस वक्त देखने को मिला, जब एक कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गहरे नाले में जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके के वीडियो साक्ष्यों के मुताबिक, कार में एक 5 साल की मासूम बच्ची भी अपने परिजनों के साथ सवार थी। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सामने से आ रही एक ई-रिक्शा को बचाने के प्रयास में कार अनियंत्रित हुई और सीधे कीचड़ भरे नाले में पलट गई। यह गनीमत रही कि स्थानीय लोगों की मदद से समय रहते कार का दरवाजा खोलकर बच्ची और अन्य सवारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, अन्यथा आज ताजनगरी में एक बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के बाद जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या अधिकारी किसी बड़े और जानलेवा हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं?

स्कूल वैन ड्राइवरों का छलका दर्द, संकरी सड़क और गहरे नाले बन रहे 'काल - इस मार्ग पर चलने वाले स्कूल वैन ड्राइवरों ने सरकार और प्रशासन से अपनी सुरक्षा और बच्चों के भविष्य के लिए गुहार लगाई है।

वीडियो में अपनी पीड़ा बताते हुए स्कूल वैन ड्राइवर विजय कुमार ने बताया कि सड़क इतनी संकरी और जर्जर है कि दो गाड़ियाँ एक साथ नहीं निकल पातीं। उन्होंने बताया:

कल ही एक वैगनआर गाड़ी यहाँ नाले में पलट गई थी। हमने शीशा तोड़कर बड़ी मुश्किल से लोगों को बाहर निकाला। अगर यही स्थिति रही, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

ड्राइवरों का कहना है कि हल्की बारिश में भी सड़क और नाला एक बराबर हो जाते हैं। घुटनों तक पानी भरने के कारण यह पता नहीं चलता कि सड़क कहाँ है और नाला कहाँ। ऐसे में स्कूली बच्चों को सुरक्षित घर छोड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। बढ़ते ट्रैफिक और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए रोड को चौड़ा किया जाए। सड़क किनारे रखे बिल्डिंग मटेरियल और अवैध पार्किंग को तत्काल हटाया जाए। खुले नालों के कारण गाड़ियाँ पलटने का खतरा बना रहता है, जिसे दुरुस्त करना अनिवार्य है। जब मुख्यमंत्री जी आगरा को करोड़ों की सौगात दे रहे हैं, तो इन महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों की अनदेखी क्यों? क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने का इंतज़ार कर रहा है?


ड्राइवरों की अपील:

हम भी चाहते हैं कि बच्चों को उनके घर सुरक्षित छोड़कर अपने परिवार के पास सकुशल पहुँच सकें। सरकार से निवेदन है कि इस सड़क का निर्माण युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए।

सड़क पर बढ़ते अतिक्रमण और अनियंत्रित ट्रैफिक के कारण पैदा हुई अव्यवस्था का सबसे बुरा असर अब स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। इस मार्ग पर कई प्रतिष्ठित स्कूल स्थित हैं, जहाँ से रोज़ाना सैकड़ों बच्चे गुज़रते हैं। जब स्कूल की बसें, वैन और ऑटो इस कीचड़ भरे और संकरे रास्ते से निकलते हैं, तो उनके गहरे नाले में पलटने का खतरा हर पल बना रहता है। सड़क की चौड़ाई कम होने और किनारों पर मलबे के ढेर होने के कारण छोटे बच्चों के माता-पिता हर समय किसी अनहोनी की आशंका से डरे और सहमे रहते हैं। प्रशासन की यह अनदेखी सीधे तौर पर मासूमों की जान के साथ खिलवाड़ है, जिससे यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या सरकार और संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे के बाद ही ठोस कदम उठाएंगे?

इस मार्ग पर केवल कीचड़ ही समस्या नहीं है। सड़क के दोनों ओर बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर्स ने अवैध कब्जा कर रखा है। ईंटों के ढेर, मलबे और सड़क पर बेतरतीब खड़े ट्रैक्टरों व लोडिंग ट्रकों की वजह से 10 मिनट का रास्ता तय करने में घंटों लग रहे हैं।


जनता की माँग: स्कूल की छुट्टी के समय भारी वाहनों की एंट्री पर पूर्ण प्रतिबंध हो। इन भारी वाहनों को केवल रात के समय ही सड़क पर आने की अनुमति दी जानी चाहिए।




'स्वच्छ भारत अभियान' की उड़ी धज्जियाँ: 16 बीघा का 'नरक'

क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या '16 बीघा' मैदान है, जिसे नगर निगम ने कूड़ा घर बना दिया है। स्थानीय निवासी श्रीमती मानवती जी और सुरेश जी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि यहाँ स्थिति विकराल है। मरे हुए जानवर सड़क किनारे सड़ रहे हैं, जिसकी बदबू से सांस लेना दूभर है।

महामारी का खतरा: सड़ांध और गंदगी के कारण पूरे क्षेत्र में महामारी फैलने की आशंका है। आगरा नगर निगम के अधिकारी अपनी ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से यहाँ कचरा डलवा रहे हैं, जो सीधे तौर पर 'स्वच्छ भारत संकल्प' का अपमान है।

उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से पुरजोर माँग

हाल ही में मुख्यमंत्री जी ने आगरा इनर रिंग रोड और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए 6466.37 करोड़ रुपये की सौगात दी है। लेकिन स्थानीय निवासियों का सवाल है कि क्या इस विकास की गंगा में राजपुर चुंगी-ताल सेमरी रोड का हिस्सा नहीं है?

स्थानीय लोगों की प्रमुख माँगें:

राजपुर चुंगी बगिया से ताल सेमरी रोड का निर्माण और चौड़ीकरण युद्ध स्तर पर शुरू किया जाए। बिल्डिंग मटेरियल सप्लायर्स के अवैध कब्जे हटाए जाएं। स्कूल बस और वैन के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाए। देश का भविष्य यानी हमारे बच्चे, रोज़ाना अपनी जान हथेली पर रखकर स्कूल जा रहे हैं। यदि समय रहते इस सड़क का कायाकल्प नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में यह बदहाली किसी बड़े जन-आंदोलन या बड़े हादसे की वजह बनेगी। प्रशासन जागे, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।

नगर निगम के एरिया इंस्पेक्टर लकी शर्मा का पक्ष:

"16 बीघा' मैदान में कूड़े के अंबार और उससे फैल रही गंदगी के मामले पर जब 'सब कुछ घर बैठे न्यूज़' के संवाददाता ने नगर निगम के एरिया इंस्पेक्टर लकी शर्मा से बात की, तो उन्होंने भविष्य में यहाँ कूड़ा न डालने का भरोसा दिया। इंस्पेक्टर ने स्वीकार किया कि फिलहाल नगर निगम के पास कूड़ा डंप करने के लिए किसी अन्य उपयुक्त जगह की उपलब्धता नहीं है, जिसकी तलाश विभाग द्वारा सक्रियता से की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक नई जगह का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक जेसीबी मशीनों के माध्यम से यहाँ जमा कूड़े को सीधे गार्वेज प्लांट भेजा जाएगा ताकि उसे रीसायकल किया जा सके और स्थानीय निवासियों को इस नारकीय स्थिति से राहत मिल सके।"

एक नजर इधर भी - राजपुर चुंगी बगिया पर ई-रिक्शों का 'कब्जा', भीषण जाम से जनता बेहाल, प्रॉपर रिक्शा स्टैंड की उठी मांग।



राजपुर चुंगी बगिया चौराहे पर ई-रिक्शा चालकों द्वारा बेतरतीब वाहन खड़े करने से दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने प्रशासन से मांग की है कि यहां एक व्यवस्थित ई-रिक्शा स्टैंड बनाया जाए, ताकि यातायात सुगम हो सके और लोगों को इस नारकीय जाम से राहत मिल सके।

ग्राउंड रिपोर्ट: Tarun Giri

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