मालेगांव: तहसील के डुबगुले-निमगुले बस्ती के निवासियों को सरकार की ओर से घरकुल मंजूर होने के बावजूद, प्रशासन द्वारा जगह उपलब्ध न होने का हवाला देकर निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है। विशेष बात यह है कि इस बस्ती के पास नौ से दस एकड़ 'गावठान' जमीन उपलब्ध है, लेकिन वहां हुए अतिक्रमण के कारण गरीबों को उनके हक के घर से वंचित रहना पड़ रहा है। निवासियों ने गंभीर आरोप लगाया है कि एक तरफ घरकुल मंजूर किया गया है और दूसरी तरफ जगह न होने का बहाना बनाकर उसे रद्द किया रहा है। उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि उक्त अतिक्रमण को हटाकर तुरंत जगह उपलब्ध कराई जाए। देश की आजादी के 80 साल पूरे होने को हैं, लेकिन आज भी इस बस्ती में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं, राशन कार्ड न होने के कारण कई परिवार सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। इन बुनियादी समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए आगामी 23 मार्च 2026 से तहसील कार्यालय में 'बेमियादी झोपड़ी आंदोलन' करने की चेतावनी दी गई है।
इस आंदोलन को लोकशाही धडक मोर्चा के संस्थापक/अध्यक्ष शेखर दादा पगार, नाशिक जिलाध्यक्ष अनिल जाधव, संविधान आर्मी की सुनीताताई महिरे, वंचित बहुजन आघाडी के शशिकांत पवार, महिरे साहब और चर्मकार समाज के नेता शंकर आहिरे ने अपना समर्थन दिया है। इस ज्ञापन पर किरण तलवारे, जालिंदर माली और अन्य कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर हैं। निवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो होने वाले आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
0 Comments