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अलीगढ़: जनपद की अतरौली तहसील अंतर्गत आने वाले गांव नहल में आज फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धा और उल्लास के साथ 'बड़ी होली' का दहन संपन्न हुआ। गांव की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए, ग्रामीणों ने अपने यथास्थान (पुराने निर्धारित स्थान) पर रात्रि लगभग 8:30 बजे विधि-विधान से होलिका प्रज्वलित की।
पुरानी परंपरा और आस्था का संगम
नहल गांव की होली अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जानी जाती है। आज भी ठीक 8:30 बजे जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हुई, पूरा वातावरण 'होली माता की जय' के उद्घोष से गूंज उठा। महिलाओं और बुजुर्गों ने पारंपरिक रूप से होलिका की पूजा-अर्चना की। गोबर के बड़कुले, सूत, फल और मिठाइयों के साथ मां होलिका को अर्घ्य दिया गया और गांव की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
भद्रा और मुहूर्त का दिखा असर
होलिका दहन के इस आयोजन के बीच ज्योतिषीय गणनाओं का भी प्रभाव देखने को मिला। गांव के प्रतिष्ठित पंडित जगदीप भारद्वाज ने शास्त्रीय नियमों और शुद्ध मुहूर्त को सर्वोपरि रखते हुए इस समय (8:30 बजे) अपने घर की होलिका का दहन नहीं किया। पंडित जी के अनुसार, इस समय 'भद्रा' का प्रभाव होने के कारण दहन शास्त्र सम्मत नहीं है। उनके नियमों और गणना के हिसाब से शुद्ध मुहूर्त मध्य रात्रि लगभग 1:00 से 1:30 बजे के आसपास बन रहा है। इसी कारण उन्होंने भद्रा समाप्ति के पश्चात ही दहन की रस्म पूरी करने का निर्णय लिया है।
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