| दिव्य दर्शन: माँ बेलौन भवानी का भव्य सजा हुआ गर्भ गृह |
बेलौन (बुलंदशहर) | बुधवार, 04 मार्च 2026
परंपरा की जीत: बेलौन में माँ भवानी की अनुमति के बिना नहीं खेली जाती होली।
बेलौन। जहाँ देशभर में लोग सुबह से ही होली के हुड़दंग में डूब जाते हैं, वहीं माँ बेलौन भवानी के पावन धाम 'बेलौन' में होली मनाने का एक विशेष और भक्तिमय नियम है। यहाँ की परंपरा इतनी अटूट है कि जब तक माँ बेलौन भवानी के साथ होली नहीं खेल ली जाती, तब तक ग्राम बेलौन का कोई भी व्यक्ति होली की शुरुआत नहीं करता।
इत्र और केसर के जल से रंगा जाता है दरबार
पण्डा पवन कुमार भारद्वाज (गोला कुंआ वाले) ने 'सब कुछ घर बैठे न्यूज़' को जानकारी देते हुए बताया कि यहाँ होली खेलने का तरीका बेहद खास और सात्विक है सबसे पहले गुलाब जल, इत्र, केसर और टेसू के फूलों को मिलाकर एक सुगंधित मिश्रण तैयार किया जाता है। इस सुगंधित जल को सबसे पहले माँ बेलौन भवानी को अर्पित किया जाता है। माँ को अर्पित किए गए इसी पवित्र जल से दरबार में उपस्थित सभी भक्तों को रंगा जाता है। इसके बाद ही गाँव में होली का उत्सव शुरू होता है।
| भक्ति के रंग में रंगा बेलौन धाम: माँ बेलौन भवानी के दरबार की भव्य होली; इत्र और टेसू के फूलों से महका परिसर। |
भक्ति और भाईचारे का संगम
इस अवसर पर माँ के दरबार में सभी ग्रामवासी और श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा न केवल माँ के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाती है, बल्कि पूरे समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य भी करती है।
पवन कुमार भारद्वाज | संवाददाता | सब कुछ घर बैठे न्यूज़ |
बेलौन, बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)
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