सब कुछ घर बैठे न्यूज़ | नई दिल्ली रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित 'राष्ट्रीय रक्षा उद्योग सम्मेलन 2026' को संबोधित करते हुए भारत को ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और युद्धों (जैसे रूस-यूक्रेन) को देखते हुए ड्रोन तकनीक में आत्मनिर्भर होना भारत के लिए अनिवार्य है।
भविष्य के युद्धों में ड्रोन निभाएंगे निर्णायक भूमिका; MSMEs और स्टार्ट-अप्स के लिए 101 नई चुनौतियां जारी
चीन पर निर्भरता खत्म करने का संकल्प रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि हमें केवल ड्रोन ही नहीं, बल्कि उसके पुर्जे—सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी—भी भारत में ही बनाने होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कई देश ड्रोन के लिए चीन जैसे देशों पर निर्भर हैं, लेकिन भारत अब इस निर्भरता को खत्म कर 'रणनीतिक स्वायत्तता' हासिल करेगा।
छोटे उद्योगों (MSMEs) के लिए बड़े अवसर सम्मेलन के दौरान रक्षा मंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं: रक्षा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नए चैलेंज शुरू किए गए। रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) के माध्यम से MSMEs और स्टार्ट-अप्स के लिए 101 नई चुनौतियां पेश की गईं, जिन्हें सरकार की ओर से फंडिंग और मेंटरशिप मिलेगी। अब तक लगभग 676 स्टार्ट-अप्स रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं और करोड़ों रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सम्मेलन में एआई (AI), रोबोटिक्स और ऑटोमेशन जैसी उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे।
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