आगरा (31 मार्च 2026): मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना 'मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम' (CM-GRIDS) के तहत शहर के विकास कार्यों में बरती जा रही गंभीर लापरवाही पर दिखाई गई खबर का बड़ा असर हुआ है। शंकर ग्रीन्स 100 फीट रोड से पुष्प नगर तक सड़क किनारे खुले छोड़े गए 'मौत के चैम्बर्स' और मैनहोल्स पर आखिरकार नगर निगम आगरा और कार्यदायी संस्था ने संज्ञान लिया है। खबर प्रसारित होने के कुछ ही घंटों के भीतर ज़मीनी स्तर पर सुधार का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया।
इस खबर के बाद जागा विभाग, देखें पूरी रिपोर्ट:
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इस व्यस्त मार्ग पर सड़क किनारे गहरे चैम्बर्स और ड्रेनेज का निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ताक पर रखा गया था। बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड के खुले छोड़े गए ये गहरे गड्ढे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक बने हुए थे। इतना ही नहीं, निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री (Material) की गुणवत्ता और ग्रेड को लेकर भी स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश था और उन्होंने इस पर गंभीर सवाल उठाए थे।
खबर का असर: वेंडर डीके लवानिया एंड कंस्ट्रक्शन ने मानी गलती
खबर के दमदार असर के बाद वेंडर हरकत में आया। वेंडर DK Lavanya & Construction की टीम अपनी मशीनरी और सुरक्षा उपकरणों के साथ मौके पर पहुँची। इंजीनियर मानवेन्द्र सिंह और सुपरवाइजर मृत्युंजय पांडेय ने मौके पर पहुँचकर स्थिति का जायजा लिया और अपनी गलती स्वीकार की।
उन्होंने सफाई दी कि एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर पहले बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन असामाजिक तत्वों द्वारा उसे हटा देने से यह असुरक्षित स्थिति पैदा हुई। उन्होंने सुरक्षा में हुई इस चूक के लिए खेद जताया।
ग्राउंड जीरो पर युद्ध स्तर पर शुरू हुआ सुधार कार्य
ताज़ा तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है कि सुपरवाइजर और इंजीनियर की मौजूदगी में सभी खुले और खतरनाक मैनहोल्स को मज़बूत जाल और हरे रंग के नेट लगाकर पूरी तरह बैरिकेड कर दिया गया है। वेंडर ने आश्वासन दिया है कि: सुरक्षा सर्वोपरि: अब एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स पर मज़बूत और स्थायी घेराबंदी रहेगी। क्वालिटी चेक: निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और ग्रेड का मानकों के अनुसार कड़ाई से पालन होगा। दोबारा नहीं होगी चूक: भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी।
एक अन्य तस्वीर में सफाई कर्मचारी सड़क किनारे फैले मलबे को साफ़ करते हुए भी नज़र आए, जिससे जनता को बड़ी राहत मिली है।
जागरूक पत्रकारिता की जीत
यह घटना साबित करती है कि यदि मीडिया और जनता जागरूक रहे, तो सोए हुए तंत्र को जगाया जा सकता है। जहाँ पहले अधिकारी सवालों से भाग रहे थे, आज वहीं जागरूक पत्रकारिता की वजह से ज़मीनी स्तर पर सुधार होता दिख रहा है। क्षेत्रीय निवासियों ने इस त्वरित कार्रवाई पर बड़ी राहत की सांस ली है।
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