मुरादाबाद (संवाददाता: गुलशन गुप्ता): उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) में प्रशासनिक तानाशाही और अनुशासनहीनता का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहाँ प्रदेश शासन और पावर कॉरपोरेशन मुख्यालय ने सार्वजनिक अवकाश घोषित किया था, वहीं मुरादाबाद के मुख्य अभियंता ने इन आदेशों को ठेंगे पर रखकर कर्मचारियों को ड्यूटी पर बुला लिया। इस मनमानी से विभाग के कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
मुख्यालय का आदेश बनाम जिले की मनमानी
UPPCL मुख्यालय और उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी स्पष्ट विज्ञप्ति के अनुसार, 26 मार्च (गुरुवार) और 27 मार्च (शुक्रवार) को पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। शासन के इस निर्देश का अर्थ था कि पूरा विभाग इन दो दिनों के लिए बंद रहेगा।
लेकिन मुरादाबाद के मुख्य अभियंता (Chief) अशोक कुमार चौरसिया ने मुख्यालय के आदेशों को दरकिनार करते हुए अपना एक नया 'कार्यालय ज्ञाप' जारी कर दिया। इस आदेश के तहत 26, 27, 29 और 31 मार्च को कार्यालय खोलने और कलेक्शन, बिलिंग व मीटरिंग जैसे कार्यों को सामान्य दिनों की तरह जारी रखने का निर्देश दिया गया।
कर्मचारियों की उपस्थिति अनिवार्य, नियमों की अवहेलना
मुख्य अभियंता के आदेश में सभी कर्मचारियों की उपस्थिति को अनिवार्य कर दिया गया है। सीधे तौर पर यह मामला शासन और कॉरपोरेशन मुख्यालय के आदेशों की अवमानना का प्रतीत होता है। कर्मचारी वर्ग का कहना है कि "ऊपर छुट्टी और नीचे ड्यूटी" वाली यह स्थिति उन पर मानसिक और प्रशासनिक दबाव बना रही है।
बड़ा सवाल: आदेश बड़ा या मनमानी?
इस मामले ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या जिला स्तर का कोई अधिकारी शासन के कैबिनेट स्तर के अवकाश आदेश को निरस्त करने का अधिकार रखता है?
क्या UPPCL में अब विधिवत आदेशों की जगह अधिकारियों की व्यक्तिगत मनमानी चलेगी?
उच्च स्तरीय जांच की मांग
कर्मचारी संगठनों और जागरूक नागरिकों ने अध्यक्ष, पावर कॉरपोरेशन से मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। मुख्य अभियंता द्वारा शासन के आदेशों को 'कूड़ेदान' में डालने वाले इस रवैये पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।
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