कलवण: महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से आद्य स्वयंभू शक्तिपीठ, सप्तशृंग गढ़ पर चैत्र यात्रा के उपलक्ष्य में भक्तों की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी है। पिछले 36 से 48 घंटों से दर्शन के लिए निरंतर लंबी कतारें लगी हुई हैं। लाखों भक्तों ने माता सप्तशृंगी के दर्शन किए, और बुधवार आधी रात को देवी के शिखर पर पारंपरिक पद्धति से भगवा रंग का 'कीर्ति ध्वज' शान से फहराया गया। इस भव्य समारोह से पूरा गढ़ भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
सैकड़ों मील की यात्रा, चिलचिलाती धूप और शारीरिक कष्ट की परवाह किए बिना भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ भगवती के दर्शन के लिए गढ़ पहुंचे। मंदिर परिसर, चढ़ाई की सीढ़ियों और पूरे गांव के विभिन्न हिस्सों में दर्शन के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। उत्तर महाराष्ट्र और खानदेश क्षेत्र से भक्त नंगे पैर गढ़ पहुंचे।
धार्मिक अनुष्ठान और महापूजा
बुधवार सुबह साढ़े सात बजे देवी के आभूषणों को ट्रस्ट के कार्यालय से ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस के रूप में मंदिर ले जाया गया। इस दौरान वातावरण अत्यंत भक्तिमय था। श्री सप्तशृंग निवासिनी देवी ट्रस्ट के ट्रस्टी एडवोकेट ललित निकम ने अपनी पत्नी के साथ श्री भगवती की पंचामृत महापूजा संपन्न की। चैत्र यात्रा के दौरान काकड़ आरती, महानैवेद्य आरती, पंचामृत महापूजा और सांज आरती जैसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।
कल दोपहर साढ़े तीन बजे ट्रस्ट के मुख्य कार्यालय से कीर्ति ध्वज की विधिवत पूजा कर पारंपरिक जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर गवली परिवार के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे। ढोल-ताशों की गूँज और "सप्तशृंगी माता की जय", "परशुराम बाला की जय", "मार्कंडेय महाराज की जय" के जयकारों के साथ यह जुलूस पहली सीढ़ी तक ले जाया गया।
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