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अन्याय के खिलाफ 'आर-पार' की जंग: रेल परियोजना प्रभावितों के साथ दिल्ली कूच करेंगे अनिल गोटे

मालेगांव। मनमाड-धुले-इंदौर रेल मार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ शिवसेना (यूबीटी) नेता और पूर्व विधायक अनिल गोटे ने 'आर या पार' की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। मालेगांव के कल्याण भवन में आयोजित रेल परियोजना प्रभावितों की बैठक में किसानों ने प्रशासन के पक्षपातपूर्ण रवैये की कड़ी निंदा की।

बैठक में किसानों ने साक्ष्यों के साथ खुलासा किया कि प्रशासन मुआवजे के वितरण में भारी विसंगति बरत रहा है। कापड़णे और देवभाने के किसानों के अनुसार एक ही क्षेत्र में कहीं 2500 रुपये प्रति गुंठा, तो ठीक बगल के खेत के लिए 5200 रुपये प्रति गुंठा की दर दी जा रही है। बाजार मूल्य 80 लाख रुपये प्रति एकड़ होने के बावजूद सामान्य किसानों को मात्र 3.80 लाख रुपये देकर बहलाया जा रहा है। आरोप है कि राजनीतिक रसूख वालों को करोड़ों का मुआवजा मिला, जबकि आम किसान के साथ अन्याय हुआ है।


राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 6 और 211 की तर्ज पर रेल मार्ग के लिए भी मुआवजा मिले। 40 आर (आर) भूमि देने वाले परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी दी जाए। मनमाड से इंदौर के बीच फलदार और वन के वृक्षों की दर हर जगह एक समान हो। 2008 के पुराने कानून के बजाय 2013 के संशोधित कानून के तहत मुआवजा मिले। वैकल्पिक भूमि: पूर्णतः भूमिहीन होने वाले किसानों को सरकार वैकल्पिक जमीन उपलब्ध कराए। अनिल गोटे ने स्पष्ट किया कि इन मांगों को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष से मुलाकात करेगा। बैठक में संभाजीराव पाटिल, योगेश खैरनार, अतुल सोनवणे सहित बड़ी संख्या में प्रभावित किसान और पदाधिकारी उपस्थित रहे।


अनिकेत मशिदकर | संवाददाता | सब कुछ घर बैठे न्यूज़ |
नासिक (उत्तर प्रदेश)

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