मालेगांव: सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रशासनिक अव्यवस्था को लेकर 'विद्यार्थी कृति समिति, मालेगांव' ने कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने महाराष्ट्र के राज्यपाल को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेश गोसावी के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
प्रमुख आरोप और मुद्दे:
प्रशासन द्वारा जारी पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुलपति के कार्यकाल में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक साख को गहरा धक्का लगा है। पिछले तीन वर्षों में विश्वविद्यालय की रैंकिंग 17 से गिरकर 90 पर पहुँच गई है। साथ ही, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा और परिणामों के प्रबंधन में भारी विफलता देखी जा रही है।
प्रशासनिक विफलता:
समिति का कहना है कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक और अधिष्ठाता जैसे महत्वपूर्ण पद पिछले ढाई वर्षों से 'प्रभारी' भरोसे चल रहे हैं। इसके अलावा, 'RUSA' जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में विफलता के कारण विश्वविद्यालय को मिलने वाले करोड़ों रुपये के फंड से हाथ धोना पड़ सकता है।
गंभीर आरोप:
पत्र में कुलपति पर राजनीति और अनैतिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। समिति ने आरोप लगाया कि सीनेट और मैनेजमेंट काउंसिल के सदस्य श्री सागर वैद्य और उनके परिवार को सोशल मीडिया पर बदनाम करने की साजिश रची जा रही है, जो बेहद निंदनीय है।
विद्यार्थी कृति समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि छात्र विरोधी नीतियों और प्रशासनिक लचरता को रोकने के लिए कुलपति का इस्तीफा नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और नाशिक जिला कलेक्टर को भी भेजी गई हैं।
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